मनमीत

मित्र तो थे, मनमीत नहीं था

स्वजनों का स्नेह बहुत था,

पर मान युग्म सा कहाँ मिला था?

तुमसे नई पहचान मिली है,

संबंधों को आँच मिली है..

त्योहारों के रंग तुम्हीं से हैं,

जीवन की हर रीत तुम्हीं से है...


कुछ शब्द जुड़े थे, काव्य नहीं था,

छंद कहूँ पर ताल नहीं था..

मधुर प्रेम के शब्द समूह का,

तुम आईं तो गीत बना है..

सुर और लय का साथ तुम्हीं से है,

जीवन का संगीत तुम्हीं से है...


- राकेश (28 Nov 2022)

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